टीचर से गांड मरवाई

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ये बात बहुत पुरानी है, जब मैं पढ़ाई कर रही थी. उस समय मैं सेक्स के बारे में तो जानती थी, पर मैं इतनी अधिक सीधी थी कि मुझे डर लगता था कि कहीं चुदाई से मुझे कोई नुकसान ना हो जाए. साथ ही घर पर पता चलने का भी खतरा था.

मेरी सारी फ्रेंड्स क्लास की सहेलियों से ज्यादा सीनियर लड़कियां हुआ करती थीं. मैं उन्हीं के साथ ज्यादा रहती थी. क्योंकि मेरी फिजिकल ग्रोथ अपनी उम्र से ज्यादा थी. मेरी चूचियां भी अच्छी खासी भरना और उठना शुरू हो गई थीं. मेरी चुचियों के उठान मेरी क्लास में सबसे अधिक मस्त थी.

मेरी सीनियर फ़्रेंड्स अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ सेक्स के बारे में आपस में चर्चा करतीं, तो उनकी बातों से मैं भी उत्तेजित हो जाती. मैंने कई बार अपनी चुत में उंगली करके अपनी उत्तेजना शांत की थी. मुझे मेरी फ्रेंड्स सेक्स के फायदे बताती थीं कि पहली बार चुदाई से दर्द तो बहुत होता है, पर मज़ा भी बहुत आता है.

ये सब सुनकर मैं भी एक बार चुदने का अनुभव करना चाहती थी, पर मेरी उम्र शायद कच्ची थी, इसलिए मुझे वो सब मना ही करती थीं. मैं फिलहाल मूली, खीरा से ही चुत रगड़ कर शांत हो जाती थी.

मेरी फ्रेंड्स ने मुझे पोर्न वीडियोज भी बताए और दिखाए थे, तो मैं सेक्स के बारे में तो काफी कुछ समझ गई थी.

उन्हीं दिनों मैंने एक वीडियो देखा. उसमें एक लड़का, लड़की की गांड में लंड पेल कर चुदाई कर रहा. मैंने अपनी एक सीनियर से पूछ लिया- ये दोनों तरफ करते हैं क्या?
उन्होंने बताया- हां पीछे भी एन्जॉय करने के लिए करते हैं, इससे बच्चे होने का डर भी नहीं रहता और मजा भी बहुत आता है.

मुझे सेक्स करना नहीं था, इसलिए मैंने इतना इंटरेस्ट नहीं लिया. पर मेरी हरकतों से मेरी फिगर बहुत अच्छी हो गई थी. मैं पूरी जवान चुदने लायक लड़की हो गई थी. इस वजह से काफी सीनियर लड़के मुझ पर लाइन मारते थे.

मैं इन्हीं सब हरकतों से पढ़ाई में इतनी कमजोर हो गई थी कि मुझे क्लास में क्या चल रहा है, कुछ समझ नहीं आता था. इसी वजह से मुझे घर पर बहुत डांट पड़ने लगी थी.

हमारे साइन्स के टीचर नाम जतिन सर था. जतिन सर दिखने में थोड़े काले थे, पर अच्छी मस्कुलर बॉडी के कारण मेरी निगाहें अक्सर उन पर टिक कर रह जाती थीं. मैं कई बार सर को देखती थी कि वो भी मुझे घूरते थे. मौक़ा मिलते ही वो मुझे टच करने का कोई अवसर भी नहीं छोड़ते थे.

मुझे शुरू में इतना ख़ास नहीं लगा. मगर हद तब हुई, जब टीचर कई बार मेरे मम्मों को अपनी कोहनी से दबा देते. या अपने हाथ से कई बार मेरे चूतड़ों को सहला देते.

मैं समझ गई थी कि वो क्या चाहते हैं, पर मैं उनके साथ वो सब नहीं करना चाहती थी.

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उनकी हवस दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी. मैं डर से कुछ नहीं कहती थी, तो इससे उनका हौसला और बढ़ता जा रहा था.

एक दिन मेरे टेस्ट हुए. मैं मैथ्स और साइंस में फेल हो गई थी. मुझे घर पर बहुत डांट पड़ी. मैंने मन मार कर पढ़ना शुरू किया, पर न जाने क्यों मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगता था.
इसी पढ़ाई के चक्कर में मैंने काफी दिनों से कोई पोर्न क्लिप नहीं देखी थी. मुझे अन्दर से ब्लू-फिल्म देखने का बहुत मन था पर इतना टाइम ही नहीं मिल पा रहा था.
जल्दी ही मेरे मासिक इम्तिहान भी शुरू होने वाले थे. इस बार मेरे घर वालों ने भी मुझसे साफ बोल दिया था कि मुझे हर हाल में पास होना ही है.

मैं कैसे भी बस पास होना चाहती थी. मैंने अपनी एक सीनियर से बात की.
तो वो बोली- मैं पढ़ाई में तेरी कोई हेल्प नहीं कर सकती क्योंकि मैं खुद टीचर से चुदवा कर पास होती हूँ.

बस उसकी ये बात सुन कर मेरे दिमाग में एक खुरापाती आईडिया ने जन्म ले लिया कि क्यों न मैं जतिन सर से चुदवा लूं!
पर मुझे बहुत डर लग रहा था.

मैंने फिर भी डर के मारे टयूशन का बहाना करके टीचर से बात की. उन्होंने मुझे अपने घर आने का टाइम दे दिया. मैंने भी अपने घर पर बात कर ली और शाम को ही ट्यूशन चली गई.

उस समय मैंने टी-शर्ट और लोअर पहन रखा था. इस टी-शर्ट में से मेरे मम्मे जबरदस्त कामुकता बिखेर रहे थे.

थोड़ी देर में मैंने नोटिस किया कि वो मुझे देख अपना लौड़ा एडजस्ट कर रहे थे.
मैं हंस दी, तो उन्हें समझ आ गया.
फिर भी उन्होंने मेरी तरफ देख कर अपना लंड सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ … क्यों हंस रही हो?
मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनके खड़े होते लंड को ही देखती रही.

उन्होंने लंड सहलाते हुए कहा- बोलो क्या समझना है?
मैंने कुछ नहीं कहा और आंखों को उनके लंड पर ही गड़ाए रही.

तभी टीचर ने अपने पैंट की जिप खोल दी. मुझे उनके बॉक्सर के खुले होल से उनका नाग फन फैलाता दिख गया.

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मैंने सर की तरफ देखा, तो उन्होंने लंड बाहर निकाल लिया. मैंने वासना से अपनी आंखें उनके लंड पर ही टिकाए रखीं.
वो उठे और मुझे हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम में ले गए.

मैंने टीचर से पूछा कि आप मेरे साथ क्या करने वाले हो?
वो पहले तो बोले- जो तुम चाहो.
मैंने सीधे सीधे कह दिया- मैं सील नहीं खुलवाना चाहती.
उन्होंने मुझे बताया कि तुम्हारी गांड बहुत जबरदस्त लगती है, मुझे सिर्फ तुम्हारी गांड मारनी है. मैं तेरी चूत को तो छुऊंगा भी नहीं.
ये सुनकर मैं खुश हो गई.

हम दोनों कमरे में जाकर उनके बिस्तर पर बैठ गए. मैंने टीचर से बातें करना शुरू कर दीं. सर मुझे सहलाए जा रहे थे. उनके हाथ मेरे मम्मों पर चल रहे थे, तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था.

मैंने सर से कहा- मेरी टी-शर्ट खराब हो जाएगी.
यह सुनकर उन्होंने अपनी बीवी की मैक्सी मुझे दे दी और बोले- लो तुम इसे पहन लो और इजी हो जाओ, जब तक मैं तुम्हारे लिए कुछ पीने का लाता हूँ.

मैंने सर के जाते ही उनकी बीवी की मैक्सी को पहन लिया.

सर का कुछ दिन पहले तलाक हो चुका था, तो वो भी लंड की प्यास से परेशान थे.

उन्होंने मेरे लिए कोल्डड्रिंक की बोतल खोली और मुझे देते हुए पूछा- क्या तुमने पहले कभी लंड देखा है.

सर इस समय मेरे सामने खड़े थे. मैं बिस्तर पर बैठी थी. मैंने सामने से खुलने वाली मैक्सी पहनी ही थी, जिसकी डोरी को हल्के से खींच कर ही मुझे नंगा किया जा सकता था.

मैंने हंस कर बोला- हाँ पोर्न में देखा है.
सर ने एकदम से बिंदास होकर मेरी मैक्सी की डोरी खींच दी और मेरे दूध मसलते हुए बोले- साली रंडी … तू तो पोर्न भी देखती है.
मैंने कहा- हाँ … मैं तो अपनी गांड में उंगली भी करती हूं.

ये सुनकर वो उत्तेजित हो गए. तब तक मैंने भी उनकी पैंट खोल कर उनका लौड़ा आज़ाद कर दिया.

सर का लंड देख कर मेरे होश उड़ गए. वो काला मोटा सा अजगर जैसा लंड था. अब तक मेरी फ्रेंड्स ने अपने ब्वॉयफ्रेंड के जितने भी लंड के फोटो दिखाए थे, ये उन सबसे बड़ा लंड था.

सर का लंड देखते ही मेरे मुँह से निकल गया- ओ माँ मर गई आज तो.
उन्होंने मेरा मुँह लेकर लंड पर टिका दिया और बोले- चल कुतिया … लॉलीपॉप चूस ले.

मैं भी खुश होकर सर का लंड चूसने लगी. मैं पहली बार कोई लौड़ा चूस रही थी. उनका लंड इतना बड़ा था कि मेरे मुँह में ही नहीं आ रहा था. मैंने बहुत प्यार से लंड चूसा.
सर मस्त हो गए और बोले- साली रंडी … आज तेरी गांड तो पक्के में फटेगी.

मैं ये सुनकर बहुत डर रही थी, पर मैं बेकाबू होकर बस लंड चूसे जा रही थी. कुछ देर में लंड का पानी निकल गया और मैंने सारा पी लिया. लंड का रस बहुत टेस्टी था. मैंने सोचा भी नहीं था कि लंड की मलाई इतनी स्वादिष्ट होती है. एकदम नमकीन और खट्टी सी मलाई ने मेरी आंखों में वासना का नशा भर दिया था. उधर सर का लंड सिकुड़ कर बेजान हो गया था.

कुछ देर तक मैंने लंड को मसल कर और चूस कर उसको फिर से खड़ा कर दिया.

अब सर ने मेरी मैक्सी हटाई और मेरी पैंटी फाड़ दी. मैं सर के फनफनाते हुए लंड से घबरा सी रही थी कि न जाने पहली बार में मेरी गांड का क्या हश्र होगा.

सर ने मुझे कुतिया बनाया और मेरी गांड में थोड़ा थूक डाल कर लंड रख दिया. मैं सच में बहुत डर और काम्प रही थी. मैं चिल्लाना नहीं चाहती थी, पर सर के एक धक्के में मेरी आँखें बाहर आ गईं.
एक अजगर जैसे लंड से मेरी गांड चिर चुकी थी. मुझे बहुत दर्द हो रहा था, उन्होंने आगे हाथ बढ़ा कर मेरा मुँह पहले ही बंद कर दिया था.

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मैं घुटी सी आवाज में बोले जा रही थी- प्लीज निकालो … मैं मर जाऊँगी … प्लीज निकाल लो.लेकिन सर को कहां कुछ सुनना था. वो तो अपनी तेज़ रफ़्तार से मेरी गांड तबाह किए जा रहे थे. मैं बहुत दर्द में थी, मेरी कराहें और सिसकारियां पूरे रूम में गूंज रही थीं. सर फिर भी किसी कसाई की तरह मेरी गांड रौंदे जा रहे थे.

मैं चिल्ला रही थी, पर वो और ज़ोर ज़ोर से लंड को मेरी कोमल सी गांड में घुसाए जा रहे थे.

फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मेरी गांड तेजी से मारना शुरू कर दी.
वो बोल रहे थे- साली रंडी तू कब तक बच सकती थी … आखिर तेरी गांड का पहला भोग मुझे ही लगाना था.

मेरे टीचर अब अपनी बीवी की तरह मुझे चोद रहे थे. मैं भी अब शांत होने लगी थी और धीरे धीरे उनका साथ देने लगी थी. मुझे दर्द अब भी हो रहा था, पर अब वो दर्द थोड़ा अपना सा और मीठा सा लग रहा था.

लंड की रफ्तार से मैं समझ रही थी कि टीचर आज अपनी वाइफ का गुस्सा मेरी गांड पर उतार रहे हैं. उन्होंने मेरी बहुत बुरी तरह से गांड मार दी.

तब भी मैं खुश थी कि मेरा पहला अनुभव इतना दर्दनाक, पर मज़ेदार हो रहा था.

वो बिल्कुल किसी जल्लाद की तरह मेरी गांड को पेल रहे थे. साथ ही उनके हाथ मेरी चुचियों का मलीदा बना रहे थे.

फिर सर ने मुझे सीधा करके मेरे मुँह में अपने लंड का सारा माल खाली कर दिया और लेट गए.

वो मुझे सहलाते हुए बोलने लगे- तूने आज मेरी लंड की प्यास शांत की है, बोल तुझे क्या चाहिए.
मैं मौके का फायदा उठाते हुए बोल पड़ी- मुझे साइंस में पास कर देना.
वो हंस दिए और बोले- ठीक है … तू पास हो जाएगी.

मैंने भी खुशी से टीचर के लौड़े को किस कर दिया. मैं फिर से लौड़े को मसल रही थी.

टीचर बोले- आज ही पूरा चुदना है क्या … कुछ कल के लिए भी छोड़ दे.

मैंने उनको फिर से पकड़ लिया और उनके ऊपर बैठ गई. अब धीरे से उनका जा रहा था. मैंने लंड पकड़ कर अपनी गांड में सैट किया ही था कि उन्होंने मुझे धक्का लगा कर लंड पर फिट कर दिया.

लंड अन्दर घुसवाते ही मैं फिर दर्द से चीख उठी. लेकिन अगले ही पल उन्होंने मुझे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. मैं उनके सामने कमसिन कली थी, पर वो मुझे अपनी बीवी की तरह चोद रहे थे.

कुछ देर मेहनत के बाद मैं उन पर ही गिर गई. ये मेरा पहली बार का गांड चुदाई का अनुभव था.

शाम जब मैं अपने घर गई, तब मेरी चाल लड़खड़ा रही थी. मुझे रात को बुखार भी चढ़ गया था. इसके बाद मैंने अपनी चुदाई के कई सोपान पूरे किए.

शुरुआती दौर में मैंने सर के साथ ही बहुत बार गांड मराई. फिर उनके बाद मैंने और भी कई दोस्तों से अपनी चुदाई का खेल खेला.

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